Monday, December 30, 2013

कसक


सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव

कुछ कहोगे या आज भी चुप ही रहोगे?’
अहोना के इस सवाल पर चौंक गया था अनमित्र क्योंकि ये सवाल कम व्यंग्य ज्यादा था। अनमित्र समझ रहा था लेकिन सब गलती क्या उसी की थी? अहोना की टीस को महसूस कर रहा था वो लेकिन पता नहीं वो उसके दर्द को महसूस कर पा रही थी या नहीं? अगर कर रही होती तो शायद लफ़्जों में व्यंग्य नहीं होता. वैसे कटाक्ष करने में तो वो शुरू से ही उस्ताद रही है। इसलिए इस मसले पर बहस करने का कोई मतलब नहीं था। और ख़ासकर तब जब दोनों ने अपने मन की बात एक दूसरे के सामने आज तक उजागर ही नहीं की थी। खासकर जब इसका वक्त था। हर चीज का एक वक्त होता है।  वैसे भी इतने दिनों बाद मिले हैं, वो भी अचानक, कुछ देर के लिए तो फिर उसे भी बहस में बर्बाद करने का कोई मतलब नहीं था।
कभी सोचा नहीं था कि इस तरह अचानक मिल जाओगी, वो भी रेलवे स्टेशन पर, जहां हममें से कोई ना कोई एक  दूसरे का इंतज़ार करता था।सियालदह रेलवे स्टेशन पर अचानक दोनों मिल गए थे।
जिंदगी में सोची हुई बातें कहां पूरी होती हैं?  सोचा नहीं था, शायद इसीलिए मिल गए
ये भी शायद कटाक्ष ही था लेकिन दर्द में डूबे थे एक एक शब्द। इसलिए बात चुभी कम, टीस ज्यादा दे गई। सिर्फ सोचने से जिंदगी में कभी कुछ होता भी है? सोच पर अमल भी करना पड़ता है। और इसके लिए चाहिए होती है हिम्मत। ये हिम्मत तब ना उसके पास थी और ना ही अहोना के पास।
उसने ध्यान से अहोना की ओर देखा। 50 फीसदी से ज्यादा बाल सफेद हो गए थे। कच्चे-पके बालों के मिश्रण से उसका व्यक्तित्व और निखर गया था। चेहरे पर बुढ़ापे की दस्तक अभी नहीं पड़ी थी। गोरा चेहरा पहले की तरह ही दमक रहा था। कान और नाक में पहले की तरह ही छोटी-छोटी बूंदें। लिपस्टिक आज भी नहीं लगाया था। सफेद छोटे-छोटे लाल फूल कढ़ी साड़ी में फब रही थी। लग रहा  था किसी स्कूल की कड़क प्रिंसिपल है। उसके मेकअप करने की आदत में अनमित्र की पसंद आज भी झलक रही थी। उम्र के इस पड़ाव में भी वो ऐसा ही मेकअप कर रही थी, जैसा उसने अनमित्र से वादा किया था वो भी तब जब वो दोनों कॉलेज में पढ़ते थे।
बालों को छोड़ दें तो तुम पर तो उम्र का कोई असर दिखता ही नहीं
अहोना ने जवाब देने की जगह उसकी ओर मुस्कुरा कर देखा था।
लिपस्टिक नहीं लगाया? हल्का लाल लिपस्टिक तो तुम पर खूब फबता है.’
मैं लिपस्टिक नहीं लगाती।
उस बात को आज तक दिल से लगा कर बैठी हुई हो। मैंने तो मजाक में कहा था...
उसने बीच में ही बात काट दी—तुम्हारे लिए मजाक होगा। मैं जो फैसला एक बार कर लेती हूं उस पर कायम रहती हूं।
वो हैरानी से अहोना की ओर देखता रह गया।

काश हमारी जिंदगी के बारे में भी तुमने कोई फैसला कर लिया होता। अनमित्र ने सोचा।

जारी...

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