Tuesday, December 31, 2013

कसक--भाग 2

'कसक' का भाग 2--अब तक आपने पढ़ा कि अचानक सियालदह रेलवे स्टेशन पर अनमित्र और अहोना की मुलाकात वर्षों बाद होती है। अब आगे...


बंगभूमि। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जम्म और कर्मभूमि नैहाटी। उन्हीं के नाम पर था कॉलेज। ऋषि बंकिम चंद्र कॉलेज।

इसी कॉलेज में पढ़ते थे दोनों। साथ आना, साथ जाना। हालांकि दोनों एक जगह नहीं रहते थे। अनमित्र कांचरापाड़ा में रहता था, जबकि अहोना श्यामनगर में। कांचरापाड़ा से ट्रेन चलती तो पहले आता हालीशहर स्टेशन, फिर नैहाटी जंक्शन। कॉलेज जाने के लिए यहीं उतरना पड़ता लेकिन अनमित्र कभी कांचरापाड़ा से आते वक्त नैहाटी नहीं उतरता बल्कि दो स्टेशन आगे श्यामनगर चला जाता था। और फिर प्लेटफॉर्म नंबर एक पर अहोना का इंतजार करता। जब अहोना आ जाती तो फिर दोनों साथ नैहाटी आते और साथ कॉलेज जाते। वापसी के वक्त भी अनमित्र कभी भी नैहाटी से सीधे कांचरापाड़ा के लिए ट्रेन नहीं पकड़ता था बल्कि उल्टी तरफ श्यामनगर जाता। अहोना को छोड़ने के बाद कांचरापाड़ा के लिए ट्रेन पकड़ता। अहोना अगर नहीं  रोकती तो शायद वो उसे घर तक छोड़ आता। अहोना ने कई बार समझाया लेकिन वो ये बहाना करता कि श्यामनगर से ट्रेन पकड़ने पर नैहाटी आते-आते उसे बैठने के लिए जगह मिल जाती है। अहोना उसके झूठ को जानती थी लेकिन चुप ही रहती थी। दस मिनट के सफर के लिए अनमित्र को बैठने की कितनी जरूरत पड़ती होगी, उसे पता था।

उस दिन कॉलेज का एनुअल फंक्शन था। ड्रेस और मेकअप के मामले में अहोना बहुत सेंसिटिव थी। फंक्शन के दिन वो खूब सज संवरकर आई थी। रोज सलवार-कुर्ते में आने वाली अहोना साड़ी में आई थी। अहोना ने लाल साड़ी के साथ चटक रंग का लाल लिपस्टिक होठों पर लगाया था। कान में लंबी-लंबी बालियां। सच कहूं तो गजब की सुंदर लग रही थी।
लेकिन उस दिन श्यामनगर स्टेशन पर मुलाकात होते ही अनमित्र ने चिढ़ा दिया था, अरे किसका खून पीकर आ रही हो। मुंह तो धो लो?’

अहोना ने जलती हुई नजरों से उसकी ओर देखा था लेकिन अनमित्र चुप नहीं हुआ—और ये कानों में क्या पहन रखा है?  पकड़ कर लटक जाने को जी चाहता है।

अहोना का चेहरा फक्क पड़ गया। हंसती-चहकती अहोना का चेहरा उतर गया। बात चुभ गई। तारीफ नहीं कर सकता था चुप ही रहता। उसका चेहरा रुआंसा हो गया था मानो चांदनी रात में अचानक आसमान पर काले बादल छा गए हो लेकिन उसने बादल को बरसने नहीं दिया। किसी तरह खुद को संभाल लिया। उसके बाद उसने चुप्पी की चादर ओढ़ ली। अनमित्र ने खूब कोशिश की लेकिन उसने किसी बात का जवाब नहीं दिया। ट्रेन पर भी छिटक कर थोड़ी दूर जाकर खड़ी हो गई।

नैहाटी उतरने के बाद वो अनमित्र को पीछे छोड़ते हुए तेज़ कदम से आगे बढ़ गई। अनमित्र का मन अपराध बोध से भर गया। अनमित्र  समझ गया था कि उसका मजाक अहोना को अच्छा नहीं लगा था।

थोड़ा आगे बढते ही अहोना को सोमा (जिसे हम सब प्यार से लंबू कहते थे), गरिमा, श्रावणी तीनों मिल गई थी। सभी साड़ी में आई थीं। यानि चारों सहेलियों ने पहले से ही प्लान कर रखा था कि साडी पहन कर आना है। सोमा, गरिमा और श्रावणी अनमित्र के लिए रूकना चाहती थीं लेकिन अहोना के पैर का मानो ब्रेक ही फेल हो गया था। अहोना नही रूकी तो बाकी सहेलियां भी साथ चली गईं। पीछे अकेला रह गया था अनमित्र।

एनुअल फंक्शन शुरू हो गया। खूब मस्ती हो रही थी। गाना बजाना डांस। पूरा कैंपस मानो मस्ती में डूब गया था। लेकिन पूरे प्रोग्राम के दौरान अहोना कहीं नहीं दिखी। सोमा से पूछा, गरिमा-श्रावणी से पूछा लेकिन किसी को कुछ नहीं पता था।
अरे, तुम सब तो उसके साथ ही गई थी तो तुमलोगों को पता तो होना चाहिए था। कैसी दोस्त हो तुमलोग?’—चिल्ला पड़ा था अनमित्र.

अब लंबू की बारी थी। जवाब उसने दिया—तुम कैसे दोस्त हो? इतने शौक से सज-संवर कर आई थी और तुमने आते ही उसका मूड खराब कर दिया। पक्के तौर पर वो घर लौट गई होगी।
अनमित्र का चेहरा फक पड़ गया। वो समझ गया था कि उसका मजाक अहोना को अच्छा नहीं लगा था या सीधे कहें तो बहुत बुरा लगा था लेकिन उसने इस बात की कल्पना भी नहीं की थी कि वो घर लौट जाएगी। जिस एनुअल फंक्शन को लेकर वो पिछले दो हफ्ते से उत्साहित थी, अपने पसंदीदा गायक के प्रोग्राम को लेकर रोमांचित थी, उसी प्रोग्राम को छोड़ कर चली गई। यानि कितनी तकलीफ हुई होगी उसे।
मेरी बात का बुरा लगा, इसलिए प्रोग्राम छोड़ कर चली गई। अरे मुंह फुला लेती, चार दिन बात नहीं करती। ऐसा तो पहले बहुत बार हो चुका है लेकिन ऐसा....

चुप रहा गया अनमित्र। समझ नहीं पाया।
तुम्हारी बात उसे बुरी लगी। इतनी बुरी कि वो प्रोग्राम छोड़ कर चली गई। इसका कुछ मतलब समझते हो। जिंदगी भर बुद्धू ही रहोगे श्रावणी ने कहा था।

अनमित्र नैहाटी रेलवे स्टेशन चला गया। प्लेटफॉर्म नंबर एक पर उसी सीट पर घंटों बैठा रहा, जहां अहोना और ग्रुप  के बाकी दोस्तों के साथ बैठकर ट्रेन का इंतजार करता था। आज वो अकेला बैठा था। कोई दोस्त नहीं थी। अहोना भी नहीं थी। पूरा एनुअल फंक्शन बर्बाद हो गया था। उसकी वजह से। उसके एक फालतू और गंदे मजाक की वजह से लेकिन उसने इतना गंभीर क्या कह दिया था। इस तरह के हंसी मजाक तो ग्रुप में चलता ही रहता था।
जिंदगी भर बुद्धू ही रहोगे?’ श्रावणी की बात उसकी कानों में गूंजने लगी।
बुद्धूबुद्धू!!  बुद्धू!!!  बुद्धू!!!!

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बुद्धू—अनमित्र के मुंह से निकल गया।
क्या कहा?’ अहोना ने पूछा।
नहीं कुछ नहीं
लगता है बुढ़ापा कुछ ज्यादा ही हावी हो गया है। बुदबुदाने की बीमारी लग गई है
नही, बूढ़ा नही कह सकती तुम मुझे। देखो मेरे एक भी बाल सफेद नहीं हुए हैं—अनमित्र ने मुस्कुराते हुए कहा था।
जब एक भी बाल सिर पर है ही नहीं तो फिर क्या काला, क्या सफेद
ठठाकर हंस पड़ा था अनमित्र। फिर  एक लंबी सांस लेते हुए कहा—हां बूढ़ा तो हो गया हूं। चेहरे पर हल्की-हल्की झुर्रियां पड़ गई हैं। पूरी तरह टकला हो गया हूं। आंख पर पॉवरफुल चश्मा चढ़ गया है। फ्रेम भी कितना गंदा सा है। बहुत भद्दा लग रहा हूं ना?
सुंदर कब थे तुमअहोना ने तिरछी नजर से देखा था उसे, बस दूसरे सुंदर लगते थे तो उनका मजाक जरूर उड़ाते थे तुम
फिर हंसा था अनमित्र—लिपस्टिक वाली बात का बदला ले रही हो ना?
नहीं, मैं लिपस्टिक लगाती ही नही। सिर्फ शादी और बहू भात के दिन लगाना पड़ा था वो भी इसलिए क्योंकि सजाने के लिए ब्यूटी पॉर्लर से ब्यूटिशियन आई थी।
अनमित्र ने एक गहरी सांस ली थी।
लेकिन क्यों अहोना? मेरा एक गंदा सा मजाक और उस पर तुम्हारी ये भीष्म प्रतिज्ञा । आखिर तुम जिंदगी भर अपने आपको ये सजा क्यों देती रही?’
ये बात तुम नहीं समझ पाओगे
हां, बुद्धू हूं मैं अनमित्र की आंखों के आगे श्रावणी का चेहरा आ गया, जो चिल्ला-चिल्ला कर कह रही थी—
बुद्धूबुद्धू!!  बुद्धू!!!  बुद्धू!!!!

क्या वो सचमुच बुद्धू ही है। उसने अहोना की आंखों में झांक कर देखने की कोशिश की कहीं वो भी उसे बुद्धू तो नहीं समझती लेकिन चश्मे ने साथ नहीं दिया। नजदीक का पॉवर अभी तक वो ग्लास में लगा ही नहीं पाया है। इसलिए पास होकर भी वो आंखें उससे दूर थीं। बहुत दूर। कुछ नहीं देख पाया। उसने चश्मा उतार लिया। रूमाल से पोंछने की कोशिश की तो अहोना ने उसके हाथ से चश्मा ले लिया। अपनी सफेद साड़ी से वो चश्मे को साफ करने लगी। कॉलेज के जमाने में भी उसका चश्मा अहोना ही अपने रूमाल से साफ कर दिया करती थी। हालांकि तब माइनस पॉवर था और वो भी बहुत कम। अब तो माइनस-प्लस दोनों पॉवर है। प्लस पॉवर बदल गय़ा है लेकिन अभी तक ग्लास बदलवा नहीं पाया है।

जारी...

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